मकान में एक द्वार  :  जब केवल एक ही मुख्य द्वार हो तो उत्तर दिशा अथवा पूर्व दिशा में सर्वोत्तम रहता है | द्वार मकान के मध्य में नहीं होना चाहिये , बल्कि वास्तु के अनुसार दिए गए स्थान पर होना चाहिये | दक्षिण दिशा में एक ही द्वार ठीक नहीं रहता है  बल्कि एक उप द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में अवश्य होना चाहिये | इसी प्रकार पश्चिम दिशा में भी एक द्वार होतो दूसरा उप द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में अवश्य होना चाहिये | ये शुभ रहता है |
मकान में दो द्वार :  जब दो द्वार लगाने हों तो इस प्रकार से होने चाहिये : उत्तर में मुख्य द्वार एवं पूर्व में उप द्वार होना चाहिये |पूर्व में मुख्य द्वार  होतो उप द्वार बाकी किसी भी दिशा में हो सकता है | दक्षिण में मुख्य द्वार होतो उपद्वार पूर्व दिशा में या उत्तर दिशा में ही होना चाहिये पश्चिम दिशा में उप द्वार नहीं होना चाहिये | पश्चिम में मुख्य द्वार हो तो पूर्व दिशा में उप द्वार होना चाहिये | पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार होतो पूर्व दिशा के अलावा अन्य किसी भी दिशा में उप द्वार नहीं होना चाहिये | 
मकान में तीन द्वार  :  जब तीन द्वार हों तो दक्षिण या पश्चिम को छोड़कर अन्य तीन दिशाओं
में तीन द्वार  अर्थार्त तीनों दिशाओं में एक – एक द्वार करके तीन द्वार लगा सकते हैं | ये शुभ
रहता है |
मकान में चार द्वार :  जब चार द्वार लगाने हों तो चारों दिशाओं में एक -एक द्वार लगाना शुभ
रहता है | द्वार को कभी भी मध्य में नहीं लगाना चाहिये , ऐसा करना बहुत ही अशुभ होता है |
ऊपर की मंजिल के द्वारों को भी नीचे की मंजिल के द्वारों के अनुरूप होना चाहिये |
आमने-सामने के दो अलग – अलग मकानों के मुख्य द्वारों को एक-दूसरे के ठीक सामने नहीं
लगाना चाहिये ये शुभ नहीं रहता है इससे द्वार वेध लगता है | आवासीय मकानों में द्वारों की ऊँचाई उनकी चौड़ाई से दुगनी या तीन गुनी से ज्यादा या कम नहीं होनी चाहिये |
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