पिरामिड एवं पिरामिड आकार की वस्तुएं व् भवनों का वास्तु शास्त्र में महत्व :
पौराणिक कथाओं , इजिप्त के पिरामिडों, तथा वैज्ञानिकों , वास्तुविदों ,व् लेखकों के अलग – अलग मतों व् तर्कों के निचोड़ के अनुसार हम इस तथ्य पर पहुंचे हैं की पिरामिड के द्वारा हम ब्रम्हांड की ऊर्जा का संग्रह एवं उद्भव कर सकते हैं | पिरामिड में उत्पन्न होने वाली शक्ति व् ऊर्जा विधुत जैसी अद्रश्य होती है , पिरामिड की कास्मेटिक एनर्जी (ब्रम्हांड ऊर्जा) में कई तरह की अलग – अलग ऊर्जाओं  व्  शक्तियों का संयोजन  होता है | डॉक्टर फ्लेनगन के अनुसार पिरामिड के विशेष आकार के अनुसार उसके पाँचों कोनों (चार बाजू के और एक छोटी का इस प्रकार पांच कोण ) में से एक प्रकार की सूक्ष्म किरणें उत्पन्न होकर एक ऊर्जा का निर्माण करती हैं | ये ऊर्जा पिरामिड की १/३ ऊंचाई पर आने वाले किंग्स चेंबर नाम के विस्तार में घनीभूत होकर एक बिंदु (फोकल पॉइंट ) पर  यह ऊर्जा केन्द्रित होती है  तथा यहाँ पर अणुओं द्वारा अवशोषित होती है | इससे अणुओं में परमाणुओं द्वारा तेज स्पंदन होता है जिससे इसके इलेक्ट्रान अपनी कक्षा को तोड़कर बहार निकलते हैं जिससे प्रचंड ऊर्जा उत्पन्न होती है |यह ऊर्जा पिरामिड के पंचों कोण से बहार निकलती है जिससे पिरामिड के आसपास का वातावरण ऊर्जा युक्त बन जाता है , ये ऊर्जा बहुत ही भव्य एवं दिव्य होती है जोकि मानवजाति के विकास के लिए महत्वपूर्ण है | इसी प्रकार से डाक्टर लेले के अनुसार पिरामिड विश्व के शाश्वत ज्ञान का जीवन एवं संयोजन हैं | पिरामिड के कोण शान्ति , गहनता, बुद्दिमता , सच्चाई व् आनंद के प्रतीक हैं | इसके त्रिकोणीय भाग त्रिस्तरीय आत्मिक शक्ति के प्रतीक हैं | पिरामिड के पूर्व का भाग प्रकाश , रोशनी के प्रतीक , पश्चिम के भाग अन्धकार का प्रतीक , दक्षिण का भाग ठंडा  तथा उत्तर का भाग गरम के प्रतीक हैं अथवा दर्शाते हैं | पिरामिड के द्वारा ऊर्जा के उच्चतम स्तर को प्राप्त करके शरीर में और पदार्थ में अंतरनिहित ऊर्जा को जाग्रत कर सकते हैं | इसके अन्दर बैठने से शान्ति एवं आनंद की अनुभूति होती है | इससे हम अपनी मानसिक शक्ति व् ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं | पिरामिड के आकार की पैकिंग डब्बे में खाने पीने की सामग्री लम्बे समय तक ख़राब नहीं होती है | पिरामिड के अन्दर रहने से या बैठने से रोगियों के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं एवं उनके ठीक होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है | पिरामिड आकार के भवन में साधना करने से जल्दी ही सिद्धि प्राप्त होती है क्योंकि इसके अन्दर मन जल्दी से शांत एवं एकाग्रचित्त हो जाता है जिससे साधक जल्दी ही ध्यानावस्था में चला जाता है | पिरामिड आकार के पैकिंग या बर्तन में रखी सामग्री स्वादिस्ट एवं पौष्टिक होती है एवं स्वास्थय के लिए फायदेमंद रहती है | पिरामिड आकार की पैकिंग या बर्तन में रखे फल एवं फूल लम्बे समय तक ताजे रहते हैं | पिरामिड ब्रह्माण्ड से धनात्मक ऊर्जा को अवशोषित करता है | पिरामिड का वास्तुशास्त्र में बहुत ही अधिक महत्व है | पिरामिड के द्वारा वास्तु के कई दोषों को दूर किया जा सकता है | पिरामिड को हमेशा विधुत एवं चुम्बक के लिए अवाहकजैसे पदार्थों से बनाना चाहिए | इसके लिए लकड़ी का उपयोग सबसे अच्छा रहता है | पिरामिड बनाने के लिए एक चोरस पेपर या हार्डबोर्ड का टुकड़ा लें जिसकी चरों भुजाओं की लम्बाई १० सेंटीमीटर हो  फिर उसको आमने सामने के कोण को जोड़ती हुई रेखा खींच कर उस रेखा पर होते हुए काट लें , इसमें चार त्रिकोण बन जाते हैं , प्रत्येक त्रिकोण के आधार की लम्बाई १० सेमी  तथा दोनों भुजाओं की लम्बाई ९.५ सेमी  यानि आधार से ५ प्रतिशत कम होनी चाहिए | इस प्रकार से बने हुए चारों त्रिकोनों को जोड़ दें तो एक पिरामिड बनकर तैयार हो जाएगा | मार्केट में बने हुए पिरामिड मिल जाते हैं | वास्तु दोषों को दूर करने के लिए भूखंड के आकार के अनुसार पिरामिडों की संख्या निश्चित की जाती है | भूखंड में उपयुक्त संख्या में पिरामिडों का इस्तेमाल करके कई प्रकार के वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है एवं उसके अच्छे परिणाम प्राप्त किये जासकते हैं | 
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