शयन कक्ष (बैड रूम ) : शयन कक्ष भवन के दक्षिण – पश्चिम किनारे या क्षेत्र में होना चाहिये अगर सभी शयन कक्ष इस क्षेत्र में बनाना संभव नहीं हो तो  बाकी शयन कक्षों को पूर्व, उत्तर – पूर्व , दक्षिण – पूर्व क्षेत्र में बनाना चाहिये | ये स्थान बच्चों व् युवा लोगों के लिये ठीक रहता है | उत्तर – पश्चिम दिशा व् पूर्व दिशा में शयन कक्ष बनाने से बचना चाहिये, क्योंकि ये दिशाएं शयन कक्ष के लिये इतनी शुभ नहीं रहती हैं | शयन कक्ष में हमेशा पलंग पर दक्षिण  दिशा में ही सिर करके सोना चाहिये | इससे दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है | बच्चे पूर्व दिशा में सिर करके सो सकते हैं , पूर्व दिशा में सिर करके सोने से ज्ञान की प्राप्ति होती है | सिर पश्चिम की दिशा में करके सोने से दुःख  एवं शोक की प्राप्ति होती है  तथा उत्तर की ओर सिर करके सोने से मृत्यु की प्राप्ति होती है | वैसे भी ये एक वैज्ञानिक कारण भी है क्योंकि उत्तर दिशा में उत्तरी पोल धनात्मक ऊर्जा होती है  एवं दक्षिण दिशा में दक्षिणी पोल होने के कारण ऋणात्मक  ऊर्जा होती है , इसी प्रकार से हमारे शरीर में भी सिर की तरफ ऋणात्मक ऊर्जा होने के कारण तथा पैरों की तरफ धनात्मक ऊर्जा होने के कारण हमको किसी भी धनात्मक या ऋणात्मक ऊर्जा का आवेश वहां वहन नहीं करना पड़ता है  अन्यथा  हमें सोने में बेचैनी तथा अनिद्रा का अहसास होगा तथा अच्छी नींद नहीं ले सकते हैं  अतः सोने की आदर्श स्तिथि दक्षिण की तरफ सिर करके सोना ही है  अतः हमें हमेशा दक्षिण की तरफ सिर करके सोना चाहिये | कमरे में पलंग या बिस्तर लगाते समय पूर्व व् उत्तर की ओर अधिक जगह छोड़नी चाहिये एवं सुबह सोकर उठने के बाद पहले अपना दांया पैर फर्श पर स्पर्श करना चाहिये तथा पूर्व की ओर चलना चाहिये | इससे हमें अच्छे परिणामों की प्राप्ति होती है  एवं दिनभर मंगलमय रहता है |
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