वास्तुशास्त्र की ब्याख्या
वास्तुशास्त्र की ब्याख्या :- वास्तुशास्त्र भवन निर्माण की एक अदभुत कला है जिसमें सभी दोषों को दूर करके भवन निर्माण की सभी खूबियों का ध्यान रखते हुए निर्माण किया जाता है जिसमें रहने वाले के लिए सभी सुखों का अनुभव … Read More
वास्तुशास्त्र की ब्याख्या :- वास्तुशास्त्र भवन निर्माण की एक अदभुत कला है जिसमें सभी दोषों को दूर करके भवन निर्माण की सभी खूबियों का ध्यान रखते हुए निर्माण किया जाता है जिसमें रहने वाले के लिए सभी सुखों का अनुभव … Read More
शुभ शकुन देखना :- यात्रा पर जाने का मुहूर्त रविवार को जावे तो घी एवं पान खाकर जाये , सोमवार को चावल खाकर व् दूध पीकर जाये, मंगलवार को गुड व् आंवला खाकर जाये , बुधवार को तिल व् मीठा … Read More
शुभ मुहूर्त :- भूमि/ प्लाट क्रय विक्रय मुहूर्त :- भूमि एवं प्लाट खरीदने या बेचने हेतु वैशाख , ज्येष्ठ, अषाढ़ , मार्गशीर्ष, माघ, व् फाल्गुन मास की द्वितीय, पंचमी, षष्ठी, दशमी, एकादशी व् पूर्णिमा तिथि में बुधवार, गुरूवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार, सोमवार, … Read More
गृह उपासना मंत्र एवं दान देने योग्य वस्तुएं :-
ग्रह रत्न एवं उसके लाभ :- 1. हीरा (Diamond) : हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है जब शुक्र ग्रह कमजोर होता है या फिर आपकी कुंडली में लग्न स्वामी शुक्र होतो तो हीरा पहनना चाहिए | हीरे का उपरत्न दूधिया या तुरसावा … Read More
पंचांग एवं कैलेण्डर तथा उसके घटक :- सप्ताह : सप्ताह में सात दिन होते हैं सप्ताह में सात वार इस प्रकार से हैं : रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरूवार, शुक्रवार, शनिवार | इन सभी वारों के अलग – अलग स्वामी … Read More
पंचांग एवं कैलेण्डर तथा उसके घटक :- सामान्यत: तिथियों को ५ पांच श्रेणियों में बांटा गया है | १. नंदा तिथि : दोनों पक्षों की प्रतिपदा , षष्ठी व् एकादशी (१,६,११,) नंदा तिथि कहलाती है | तिथि गंडांत काल /समय प्रथम … Read More
पंचांग एवं कैलेण्डर तथा उसके घटक :- समय : हमारे जीवन में समय का विशेष महत्व है | हम सभी समय के अनुसार ही कार्य करते हैं , प्रत्येक देश में मानक समय का प्रचलन है | यह एक विशेष … Read More
कोई भी शुभ कार्य गंडांत समय में नहीं करना चाहिए ! तिथि गंडांत : नंदा तिथि के आदि (शुरुआत) की, एवं पूर्णा तिथि के अंत की एक घडी अर्थार्त २४ मिनट का समय अशुभ होता है इसलिए इस समय में … Read More
कालसर्प योग एवं उपाय :- जन्म कुंडली में सभी ग्रह जब राहु एवं केतु के मध्य या बीच में पड़े या स्थापित हों तब कालसर्प योग बनता है | इस योग में जन्मे व्यक्ति नौकरी, व्यवसाय, परिवार, संतान, आदि के … Read More