Sundarkand (सुन्दरकाण्ड)

Ramayan

          दोहा निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति। बेगि चलिअ प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति ॥31 ॥ चौपाई सुनि सीता दुख प्रभु सुख अयना। भरि आए जल राजिव नयना ॥ बचन कायँ मन … Read More →

sundarkand (सुन्दरकाण्ड)

Ramayan

          दोहा हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास। अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास ॥25 ॥ चौपाई देह बिसाल परम हरुआई। मंदिर तें मंदिर चढ़ धाई ॥ जरइ नगर भा लोग बिहाला। झपट लपट … Read More →

Sundarkand (सुन्दरकाण्ड)

Ramayan

          दोहा कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि । कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि  ॥18 ॥ चौपाई सुनि सुत बध लंकेस रिसाना। पठएसि मेघनाद बलवाना  ॥ मारसि जनि सुत बाँधेसु ताही। … Read More →

sundarkand (सुन्दरकाण्ड)

Ramayan

          दोहा कपि के बचन सप्रेम सुनि उपजा मन बिस्वास । जाना मन क्रम बचन यह कृपासिंघु कर दास ।। 13 ।। चौपाई हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी । सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी ।। बूड़त बिरह … Read More →

sundarkand (सुन्दरकाण्ड)

Ramayan

          दोहा  निज पद नयन दिएँ मन राम पद कमल लीन । परम दुखी भा पवनसुत देखि जानकी दीन ।। 8 ।। चौपाई तरू पल्लव  महुँ रहा लुकाई । करइ बिचार करौं का भाई ।। तेहि … Read More →

Sundarkand (सुन्दरकाण्ड)

Ramayan

          दोहा पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार । अति लघु रुप धरौं निसि नगर करौं पइसार ।। 3 ।। चौपाई मसक समान रुप कपि धरी । लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी ।। नाम लंकिनी … Read More →

Sundarkand (सुन्दरकाण्ड)

Ramayan

          सुन्दरकाण्ड श्लोक शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफ़णीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरूं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करूणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम् ।। 1 ।। नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽ स्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा । भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंग्ङव निर्भरां … Read More →

देवी मन्त्र (DEVI MANTRA)

Bhawani mata

          देवी मन्त्र (DEVI MANTRA) या देवी सर्वभूतेषु मातृ रुपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः || या देवी सर्वभूतेषु शक्ती रुपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः || या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रुपेण संस्थिता | … Read More →

पितृ पक्ष एवं उसमें में श्राद्ध व् तर्पण का महत्त्व

पितृ पक्ष एवं उसमें में श्राद्ध व् तर्पण का महत्त्व हमारे धर्मशास्त्र एवं पुरानों के अनुसार मृत पितरों को पिण्डदान करने वाला हर व्यक्ति दीर्घायु, पुत्र-पौत्रादि, यश, स्वर्ग, लक्ष्मी, सुख साधन तथा धन-धान्य आदि से परिपूर्ण होता है तथा पितरों … Read More →