ब्रह्मचर्य

? ब्रह्मचर्य ? कामवासना को उत्तेजित करने वाले खान-पान, दृश्य-श्रव्य एवं श्रृंगारादि का परित्याग कर सतत वीर्य-रक्षा करते हुए ऊर्ध्वरेता होना ब्रह्मचर्य कहलाता है।अष्टविध मैथुन-वासना की दृष्टि से किसी का दर्शन, स्पर्शन, एकान्त-सेवन, भाषण, विषय-कथा, परस्पर क्रीड़ा, विषय का ध्यान … Read More →

प्राणायाम एवं योग में बंध का महत्त्व |

प्राणायाम एवं योग में बंध का महत्त्व | योग में एक रहस्य है जो ऊर्जा को रोक कर रखता है |ऊर्जा यानी प्राणमय कोष होता है , ऊर्जा का वास शरीर की पांच परतों में से तीसरी परत में होता … Read More →

प्राणायाम क्या है  एवं प्राणायाम  तथा प्राण का क्या सम्बन्ध है ?

प्राणायाम क्या है  एवं प्राणायाम  तथा प्राण का क्या सम्बन्ध है ? प्राणायाम करने वाली एक नासिका में दो छिद्रों का महत्त्व एवं प्राणायाम तथा प्राण का सम्बन्ध  | प्राण यानि शरीर को चलाने वाली शक्ति | प्राण यानि फोर्स … Read More →

कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत करने के लाभ

कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत करने के लाभ  :-   कुण्डलिनी  शक्ति जागरण विधा अन्धकार को दूर करने का सशक्त माध्यम है। स्यंव को समझने व् दूसरे को पहचानने व् घर परिवार समाज और ब्रहमांड को समझने का मार्ग है ।कुण्डलिनी शक्ति जागरण चारों … Read More →